Home शासन प्रशासन श्रीअनिल पुरोहित,रचनाशीलता,सरोकार और सतत् प्रेरणा का उजास।

श्रीअनिल पुरोहित,रचनाशीलता,सरोकार और सतत् प्रेरणा का उजास।

    मोहनलाल सोनी,अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश

      (सचिव,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,अलवर )

जीवन में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो केवल अपने लिए नहीं जीते,वे अपने जीवन की विविधता ,रुचियों और कर्मों से समाज के लिए एक दिशा और दृष्टि प्रस्तुत करते हैं। उनके विचार, रचनाएं और अनुभव समाज की चेतना को जाग्रत करते हैं और भावनाओं को गहराई देते हैं। ऐसा ही एक व्यक्तित्व है,जिसका नाम “अनिल पुरोहित” है।

मूलरूप से सुजानगढ़ जिला चूरू के निवासी हैं श्रीअनिल पुरोहित।मैं उन्हें केवल एक लेखक,पत्रकार या फोटो ग्राफर के रूप में नहीं देखता,बल्कि उन्हें एक जीवंत चेतना, सृजनधर्मी व्यक्तित्व और बहुआयामी प्रेरणास्रोत के रूप में अनुभव करता हूं। उनका हालिया साक्षात्कार ‘एक बुक जर्नल’ पर पढ़कर मुझे जहां अपार खुशी हुई, वहीं भीतर तक एक आत्ममंथन भी उत्पन्न हुआ। लेखन,पत्रकारिता और फोटोग्राफी एक त्रिकोणीय साधना। श्री पुरोहित का लेखन केवल भावनाओं का विस्तार नहीं है, वह यथार्थ की अनुभूतियों को संवेदना के माध्यम से अभिव्यक्त करने की शक्ति रखता है। अब तक लगभग 7 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में वर्षों से प्रकाशित हो रहे हैं,और उनकी लेखनशैली पाठकों को आत्मीयता से बाँधती है। उनके लेखन में समाज, समय और सत्य की गूंज है, जिसमें पाठक न केवल विचार करता है बल्कि खुद से संवाद भी करता है।

उनकी लिखी गई पुस्तक और बहुत से लेख बुक ऑफ जनरल एवं अमेजॉन पर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन उपलब्ध है।उन्होंने साहित्य की अनेक विधाओं कविता, कहानी लेख,उपन्यास एवं लघु कथा में अनेक विषयों में सामाजिक समरसता,प्रेम,संवेदनाएं हास्य , व्यंग्य , हॉरर , परालौकिक वन्य जीव एवं पर्यावरण आदि पर बहुत सी रचनाएं लिखी है।

पत्रकारिता में भी उनकी पैठ गहराई से जुड़ी है,वे एक विश्लेषक की दृष्टि रखते हैं,और घटनाओं के भीतर छिपे तथ्यों तक पहुँचते हैं। उनके रिपोर्ट्स और विश्लेषणों में एक साफगोई और ईमानदारी होती है, जो आज के दौर में विरल है।फोटोग्राफी उनके लिए केवल दृश्य कैद करना नहीं है, बल्कि वह समय को थामने और क्षण को जीवंत बनाने की कला है। उनकी खींची तस्वीरों में दृष्टिकोण, प्रतीक और कहानी होती है।और साथ ही उनका डाक संग्रह_एक शांत लेकिन समर्पित शौक—उनके जिज्ञासु और संग्रहशील स्वभाव को उजागर करता है।

एक प्रेरणा जो मेरे जीवन में संचारित हुई:- मैं अपने अनुभवों को साझा करते हुए यह कहना चाहता हूँ कि बचपन से ही श्री अनिल जी की रचनात्मकता ने मुझे प्रभावित किया है।उनकी लेखनी,उनकी भाषा,और उनकी सोच ने मेरे भीतर भी अभिव्यक्ति की प्रेरणा को जन्म दिया।उन्हीं मूल प्रेरणाओं ने मुझे भी साहित्य और विचार की ओर अग्रसर किया,और जीवन के विभिन्न मोड़ों से होते हुए मैं न्यायिक सेवा में न्यायाधीश के पद तक पहुँचा।

हालाँकि, इस दिशा में आने के बाद जीवन की जिम्मेदारियों और व्यस्तताओं ने मुझे साहित्य और रचनात्मकता से कुछ दूरी पर ला खड़ा किया। आज जब मैं श्री अनिल जी की निरंतर सक्रियता को देखता हूँ, तो हृदय के किसी कोने में यह पीड़ा भी जन्म लेती है कि मैं उनसे अधिक जुड़ नहीं पाया,उनके अनुभवों से उतना सीख नहीं सका, जितना सीखना चाहिए था।

संवाद की रिक्तता,और पुनःजुड़ने की उत्कंठा

हमारे बीच वर्षों से अनकहे संवाद और मौन रहे — यह जीवन की व्यस्तता रही हो या परिस्थितियों की दीवारें — लेकिन आज जब मैं उनके बारे में और जानता हूं, तो लगता है जैसे किसी रत्न को बहुत करीब होते हुए भी पहचान नहीं पाया।एक आत्मीय खेद भी मन में है कि उनके सान्निध्य का लाभ कम ही मिल पाया।परंतु अब जब उनका विस्तृत साक्षात्कार पढ़ा, तो मेरे भीतर एक नई ऊर्जा,एक नवचेतना जागृत हुई है —उनके अनुभवों से, उनकी निष्ठा से, और उनकी जीवंतता से प्रेरणा लेने की।

शुभकामनाओं के साथ…..मैं यह कहना चाहता हूँ कि श्री अनिल पुरोहित जैसे व्यक्तित्व किसी एक विधा तक सीमित नहीं रहते।वे जीवन के हर पक्ष में प्रेरणा होते हैं। उनकी लेखनी एक दिशा है,उनकी दृष्टि एक आलोक है, और उनका समर्पण हम सबके लिए एक सीख है।

मैं पूरे हृदय से उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ कि वे अपनी इस रचनात्मक यात्रा में अनवरत आगे बढ़ें, नई ऊँचाइयाँ छुएं, और समाज को उसी तरह रोशन करते रहें, जैसे अब तक करते आए हैं।

मैं स्वयं भी अवसर पाकर शीघ्र उनसे प्रत्यक्ष भेंट कर उनके अनुभवों से सीखना चाहूँगा और इस बार कोशिश रहेगी कि वक्त, दूरी या मौन – कुछ भी हमारे बीच न आए।आपका जीवन, आपकी साधना और आपकी ऊर्जा — हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

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