स्वर्णकार सभा जयपुर,चुनाव के बाद भी विवाद यथावत।

नाद की आवाज़, जयपुर।

श्री मैढ क्षत्रिय स्वर्णकार सभा,जयपुर के आम चुनाव पिछले वर्ष दिसंबर माह में संपन्न हुए थे,समाज के लोगों को उम्मीद थी कि लगभग 20 वर्षों से न्यायालय में चल रहे सभी विवाद अब समाप्त हो जाएंगे,सभा और संगठन एक नए सिरे से विकास के नए आयाम स्थापित करेंगे,समाज को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर नई दिशा मिलने की आशा थी। लेकिन समाज की आशाएँ आज चुनावों के एक वर्ष बाद भी अधूरी हैं।

चार्ज हैंडओवर अब भी अधर में…

चुनाव परिणाम के अनुसार श्री विजेंद्र जोड़ा को सभा का अध्यक्ष चुना गया था। समाज को विश्वास था कि अब संगठन सुचारू रूप से संचालित होगा, विकास कार्यों को गति मिलेगी और वर्षों से रुके हुए विकास के कामों को गति मिलेगी। लेकिन चुनाव के एक वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सभा का संपूर्ण रिकॉर्ड, दस्तावेज़ और चार्ज आज भी चुनाव अधिकारी श्री टीकाराम त्रिवेदी के पास ही है,न तो श्री टीकाराम त्रिवेदी ने चार्ज सौंपा है और न ही श्री विजेंद्र जोड़ा ने चार्ज प्राप्त करने के लिए न्यायालय में कोई प्रभावी पैरवी की है।

समाज के कुछ पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति में न तो श्री विजेंद्र जोड़ा को अवमानना याचिका या उज़रदारी में पक्षकार बनाया गया है और न ही उन्होंने स्वयं को पक्षकार बनाए जाने हेतु कोई पहल की है। श्री टीकाराम त्रिवेदी का कहना है कि उन्हें चार्ज सौंपने के संबंध में अदालत से अभी तक कोई स्पष्ट आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। साथ ही, चार्ज या रिकॉर्ड प्राप्त करने हेतु भी अब तक किसी प्रकार की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है,ना ही इसके लिए सक्षम न्यायालय से अपील की गई है।

अगली सुनवाई – 16 दिसंबर 2025

रजिस्ट्रार सहकारी संस्था को जवाब देने के लिए अगली तारीख 16 दिसंबर 2025 तय की गई है। इस सुनवाई से समाज को उम्मीद है कि वर्षों से रुकी प्रक्रिया में कुछ ठोस दिशा मिलेगी।

समाज में बढ़ती चिंता

समाज के कई जागरूक सदस्य इस स्थिति से चिंतित हैं। उनका कहना है कि 20 वर्षों बाद चुनाव होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन चार्ज हस्तांतरण न होने से समाज की एकजुटता, विकास और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। न्यायालय में लंबित अन्य मुकदमों में भी समाज की पैरवी प्रभावित हो रही है।

समाज में यह भी सवाल उठ रहा है कि जब चुनाव के बाद नई कार्यकारिणी का गठन हो चुका है,तब भी पुराने रिकॉर्ड के हस्तांतरण में देरी क्यों हो रही है, और इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

जब तक चार्ज और रिकॉर्ड का हकदार व्यक्ति कार्यभार ग्रहण नहीं करता, तब तक संगठन का सुचारू संचालन संभव नहीं है। समाज को इंतजार है कि 20 वर्ष बाद मिला परिवर्तन का अवसर व्यर्थ न जाए और संगठन पुनः विकास की ओर अग्रसर हो।

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