कोई वास्तु दोष या कोई ग्रह नक्षत्र किसी मनुष्य का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। कोई शनि से परेशान है तो कोई राहु से परेशान रहता है । परंतु सच तो यह होता है कि हम सब प्राणी मात्र अपने आप से दुख और परेशानी प्राप्त करते हैं, बहुधा अपनी परेशानी का सृजन स्वयं ही करते रहते हैं परंतु दोष मढ़ देते है शनि और राहू पर। यह उचित नहीं है ।थोड़ी संभावना यह हो सकती है कि हो सकता है कि आपके पूर्व जन्म के कुछ प्रारब्ध आपकी पीड़ा के मूल कारक हों लेकिन यदि ऐसा भी है तो बहुत अच्छा है इससे दुखी नहीं होना चाहिए क्योंकि पूर्व के प्रारब्ध घटित हो कर घट रहें यानी समाप्त हो रहे है तो जान लीजिए की आप का अगला जन्म या समय ठीक होगा यह तय है परंतु आप इसको रोक नहीं सकते यह विधि का विधान हैं, परम ब्रह्म का ब्रह्मांड संचालन का सिद्धांत है इसमें कोई संदेह नहीं, कोई हस्तक्षेप नहीं हो सकता है, इसमें कोई विचलन नहीं । धीरज रख सकते है तो रख लीजिए यही आपके बस में है बाकी कुछ नहीं ।
जैसा की मैं ऊपर कह चुका हूँ कि बहुधा आप अपनी परेशानी का सृजन स्वयं ही करते रहते हैं वो इस प्रकार से होते है जैसे-
यदि आप सनातनी है या किसी भी मजहब या पंथ संप्रदाय या जीवन शैली को मानने वाले है तो आप उन मार्गदर्शक सिद्धांतो की अवहेलना नहीं करे जो आपके अपने अंगीभूत किए गये पंथ/ संप्रदाय/धर्म या मजहब में स्थापित किए गए है । उदाहरण स्वरूप किसी भी मजहबी जीवन शैली में नशा/ अनियमित दिनचर्या/ घृणित कार्य/ अस्वास्थ्यकर भोजन एवं असंयमित सोना जागना/ बड़े बुजुर्गों की अवहेलना/ उनका अनादर इत्यादि वर्जित ही होंगे न की अपनाने को कहा गया होगा । परंतु हम बहुधा ऐसा ही करते रहते है और प्रतिफल में प्राप्त रोग-शोक, दुख दारिद्र्य, धन हानि, तिरस्कार, पतन और विनाश को प्राप्त करते हैं और मूलधन के साथ ब्याज के रूप में अहंकार/ क्रोध/ ईर्ष्या भी भरपूर मात्र में प्राप्त करते हैं, जो प्रारब्धी कष्टों को कई गुना बढ़ा देते है।
लेकिन हम ग्रह और भाग्य को कोसते समय काटते हैं कभी अपनी गलतियों को मानने की सुधारात्मक पहल नहीं करते हैं । यदि हम यानी मनुष्य केवल अपनी गलतियों को छिपाने की भूल करना छोड़ दें तो वही से कुछ बेहतर होने लगता, समय सुधरने लगता है और बचा समय/शेष समय अच्छा लगने लगता है। तब तथाकथित बिगड़ा/ ग़लत वास्तु अच्छा बन जाता है ।
अतः हमे अपने में झांक लेना चाहिये और अपने किये को आँक लेना चाहिये न की अपने दुखों/ कष्टों के लिए ग्रह- नक्षत्रो इत्यादि करको को दोषी ठहराना चाहिये ।
अनिल कुमार तिवारी

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