जयपुर नाद की आवाज़।
“लोकतंत्र सर्वोपरि, जनता का हित हमारा हित” विषय को लेकर एनएसएस, सिख अध्ययन केंद्र,राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर एवं मंच मिनिस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा संसद की जयपुर में भव्य आयोजन किया गया है।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि नीरज के पवन ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा ही लोकतंत्र की असली शक्ति हैं और ऐसे मंच उन्हें नीति निर्माण को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम में निर्णायक मंडल के रूप में ए. वी. शुक्ला (पूर्व पुलिस महानिरीक्षक), एन. के. गुप्ता (पूर्व आईएएस), प्रो. श्याम मोहन अग्रवाल, एडवोकेट बुलबुल पाठक और सीनियर जर्नलिस्ट त्रिभुवन मौजूद रहे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. एस. पी. भटनागर (क्षेत्रीय निदेशक, एनएसएस) तथा प्रो. आर. एन. शर्मा (मुख्य कुलानुशासक, राजस्थान विश्वविद्यालय) की गरिमामयी उपस्थिति रही। सत्र की अध्यक्षता डॉ. निकी चतुर्वेदी एवं डॉ. मीना रानी ने की, जिन्होंने संसदीय मर्यादाओं, तर्कपूर्ण असहमति और लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा पर बल दिया।
सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने “संविधान सर्वोपरि, लोकतंत्र हमारी पहचान” जैसे नारों के साथ सभागार को ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से संबंधित विधेयक को किरेन रिजिजू द्वारा सदन में प्रस्तुत किया गया, जिस पर पक्ष-विपक्ष से संतुलित और तथ्यात्मक चर्चाएं हुईं।
कार्यक्रम के समन्वयक मोहित शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि “देश के 23 राज्यों से 400 से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 200 प्रतिभागियों का चयन कर उन्हें संसद में चर्चा का अवसर दिया गया। युवाओं को एक मंच पर सुनना अपने-आप में एक अनोखा अनुभव है।
वहीं सह-समन्वयक जालम सिंह के कुशल मंच संचालन एवं वाणी की प्रभावशाली प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया।
राष्ट्रीय युवा संसद के दूसरे दिन सदन में ‘वक्फ संशोधन विधेयक’ पर व्यापक और गंभीर चर्चा प्रस्तावित है।


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